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“अधिवक्ता सोचते हैं कि जनहित याचिकाओं में पूरा बोझ कोर्ट पर डाला जा सकता है, पीआईएल किसी अन्य रिट याचिका की तरह है और दलीलों के नियमों का पालन करना होगा”: सुप्रीम कोर्ट

“अधिवक्ता सोचते हैं कि जनहित याचिकाओं में पूरा बोझ कोर्ट पर डाला जा सकता है, पीआईएल किसी अन्य रिट याचिका की तरह है और दलीलों के नियमों का पालन करना होगा”: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि जनहित याचिका दायर करते समय वादियों को दलीलों के नियमों का पालन करना होगा और तथ्य-खोज का पूरा बोझ अदालतों पर नहीं छोड़ा जा सकता है।

“अधिवक्ता सोचते हैं कि जनहित याचिकाओं में पूरा बोझ अदालत पर डाला जा सकता है। आप कम से कम जो एफआईआर हैं,उनका हमें विवरण दें। जनहित याचिका किसी अन्य नियमित रिट याचिका की तरह है। आपको अपनी मदद करनी होगी और दलीलों के नियमों का पालन करना होगा, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने केंद्र की कोविड -19 टीकाकरण नीति पर सवाल उठाने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा।

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