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सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत पत्नी के भरण-पोषण पाने का अधिकार तभी समाप्त हो सकता है जब व्यभिचार कृत्य को बार-बार किया जाए : दिल्ली हाईकोर्ट

“सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत पत्नी के भरण-पोषण पाने का अधिकार तभी समाप्त हो सकता है जब व्यभिचार कृत्य को बार-बार किया जाए : दिल्ली हाईकोर्ट “


दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहराया है कि केवल निरंतर और बार-बार व्यभिचार (या व्यभिचार में सहवास) करने पर ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 (4) के तहत प्रावधान की कठोरता लागू होगी। सीआरपीसी की धारा 125(4) में कहा गया है कि कोई भी पत्नी अपने पति से भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी यदि वह व्यभिचार में रह रही है, या बिना किसी पर्याप्त कारण के अपने पति के साथ रहने से इनकार करती है, या यदि वे आपसी सहमति से अलग रह रहे हैं।


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