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सम्पत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग 3: सूचना क्या होती है और कितने प्रकार की होती है

“अपनी पसंद के दावे का प्रयोग करने का अधिकार स्वतंत्रता और किसी व्यक्ति की गरिमा का एक अविभाज्य हिस्सा : जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय

संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 भारत में अधिनियमित सिविल विधियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस सीरीज के अंतर्गत लेखक द्वारा संपत्ति अंतरण अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर आलेख लिखे जा रहे हैं इस श्रंखला में इस आलेख के अंतर्गत इस अधिनियम की धारा 3 जोकि इस अधिनियम में उपयोग किए गए महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषाएं तथा स्पष्टीकरण प्रस्तुत करती है का वर्णन किया जा रहा है। इससे पूर्व के आलेख में इस ही धारा से संबंधित स्थावर संपत्ति शब्द पर विस्तारपूर्वक टीका टिप्पणी की गई थी। इस आलेख के अंतर्गत संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 3 में उल्लेखित किए गए सूचना के प्रकारों पर प्रकाश डाला जा रहा है तथा इससे संबंधित कानून को विस्तारपूर्वक टीका सहित तथा महत्वपूर्ण न्याय निर्णय सहित प्रस्तुत किया जा रहा है।

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