Breaking News

सजा ए मौत – अदालत दोषियों के सुधार की संभावना पर विचार करने को बाध्य, भले ही आरोपी खामोश रहे : सुप्रीम कोर्ट

“सजा ए मौत – अदालत दोषियों के सुधार की संभावना पर विचार करने को बाध्य, भले ही आरोपी खामोश रहे : सुप्रीम कोर्ट “


सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दो मौत की सजा के दोषियों द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर 30 साल की अवधि के लिए आजीवन कारावास में बदलने की अनुमति दी। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अदालत का कर्तव्य है कि वह मौत की कठोरतम सजा लागू करने से पहले दोषियों के सुधार की संभावना के संबंध में सभी प्रासंगिक जानकारी हासिल करने के लिए बाध्य है, भले ही आरोपी खामोश रहता है। साथ ही, राज्य का यह कर्तव्य है कि वह यह साबित करने के लिए सबूत जुटाए कि आरोपी के सुधार और पुनर्वास की कोई संभावना नहीं है।


Source Link

About admin

Check Also

साइबर क्राइम क्या है भाग 2: कौन से काम साइबर अपराध माने जाते हैं

“नाबालिग पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार की श्रेणी में आता हैः मध्य प्रदेश …