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दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश से फिर एक हुआ नवविवाहित जोड़ा, याचिका निस्तारित करते हुए कोर्ट ने कहा, “अंत भला तो सब भला”

“अगर किरायेदार विवाद करता है कि संपत्ति वक्फ की नहीं है तो बेदखली का मुकदमा वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष सुनवाई योग्य है : सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अदालत के आदेश से फिर एक हुए नवविवाहित जोड़े के मामले के तथ्यों पर ध्यान देते हुए कहा कि “अंत भला तो सब भला।” अदालत ने पति की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा किया, जिसमें पति ने आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी को उसके माता-पिता ने उससे अलग करने के बाद उत्तर प्रदेश के एटा जिले में अवैध रूप से अपने कब्‍जे में रखा हुआ है। जस्टिस अनूप जे भंभानी और जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया था कि वो एक महिला कांस्टेबल को दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल के साथ भेजे, जो याचिककर्ता की पत्नी वापस दिल्ली लेकर आए और और पति और पत्नी को ‌फिर से एक करने के मामले को कोऑर्डिनेट भी करे।

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