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केवल यह तथ्य कि लड़की विवाह योग्य उम्र से कम है, उसे जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं करता: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन जोड़े को सुरक्षा प्रदान की

    “नौकरी देने का झूठा वादा करके यौन संबंध के लिए पीड़िता की सहमति प्राप्त करना ‘स्वतंत्र सहमति’ नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट


    पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने माना है कि केवल यह तथ्य कि याचिकाकर्ता-लड़की विवाह योग्य आयु की नहीं है, उसे भारत के नागरिक होने के नाते संविधान में परिकल्पित मौलिक अधिकार से वंचित नहीं करेगा। न्यायालय ने नाबालिग लड़की को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। जस्टिस हरनरेश सिंह गिल ने कहा कि संवैधानिक दायित्वों के अनुसार प्रत्येक नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करना राज्य का बाध्य कर्तव्य है।


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